साढ़ेसाती कैलकुलेटर — आपकी शनि साढ़ेसाती की तारीखें
साढ़ेसाती कब शुरू हुई, अभी कौन-सा चरण चल रहा है और कब खत्म होगी — और जीवन की बाकी हर साढ़ेसाती भी। अपनी चंद्र राशि चुनें, या जन्म विवरण डालें; राशि अपने-आप निकल आएगी।
आपकी चंद्र राशि (जन्म राशि)
जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में था, वही — नाम के पहले अक्षर वाली राशि नहीं।
साढ़ेसाती क्या है
जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में था, उससे बारहवीं, पहली और दूसरी राशि में जब शनि गोचर करता है, उसे साढ़ेसाती कहते हैं। शनि एक राशि में लगभग ढाई साल रहता है, इसलिए तीनों राशियाँ मिलाकर करीब साढ़े सात साल लगते हैं — यहीं से नाम पड़ा। चंद्रमा मन है, और मन पर शनि का गोचर भार की तरह महसूस होता है: काम देर से बनते हैं, खर्च बढ़ता है, धैर्य की परीक्षा होती है।
यह श्राप नहीं है, और न ही कोई एक घटना। यह लंबा समय है जिसमें समय, श्रम और कर्मफल का ग्रह शनि उस हिस्से पर बैठता है जो सुख-चैन को दर्ज करता है। जो बिना मेहनत के खड़ा था, वह अक्सर इसी दौर में हिलता है; जो मेहनत पर टिका था, वह बचा रहता है।
साढ़ेसाती के तीन चरण
| चरण | चंद्र से शनि | किस पर दबाव |
|---|---|---|
| पहला चरण | द्वादश | खर्च, हानि, नींद, दूर-देश और अलगाव। पैसा आने से ज़्यादा तेज़ी से जाता है; पुराने सहारे छूटते हैं। |
| दूसरा चरण | प्रथम | शरीर और मन स्वयं। थकान, उदासी, स्वास्थ्य पर ध्यान की ज़रूरत, और यह भाव कि परीक्षा आपकी ही हो रही है। |
| तीसरा चरण | द्वितीय | परिवार, बचत, वाणी और भोजन। घर में खिंचाव, रुका हुआ पैसा, और ऐसे शब्द जिनकी क़ीमत चुकानी पड़े। |
सबसे भारी अक्सर दूसरा चरण होता है — जब शनि ठीक चंद्र राशि पर होता है। शनि वक्री होकर पिछली राशि में लौट भी सकता है, इसलिए कोई चरण शुरू होकर कुछ महीने रुक सकता है और फिर चल पड़ता है। कैलकुलेटर हर ऐसा बदलाव दिखाता है।
सभी 12 राशियों की साढ़ेसाती की तारीखें
1990 से 2060 के बीच की हर साढ़ेसाती, और 2020–2040 की ढैया, सभी बारह चंद्र राशियों के लिए। तारीखें भारतीय मानक समय (IST) में हैं। † का अर्थ है कि उस साढ़ेसाती के बीच शनि वक्री होकर कुछ समय बाहर गया।
मेष राशि
- साढ़ेसाती 1 जून 1995 – 7 अप्रैल 2003 †पहला चरण 1 जून 1995 से · दूसरा चरण 17 अप्रैल 1998 से · तीसरा चरण 6 जून 2000 से
- साढ़ेसाती 29 मार्च 2025 – 30 मई 2032पहला चरण 29 मार्च 2025 से · दूसरा चरण 2 जून 2027 से · तीसरा चरण 7 अग॰ 2029 से
- साढ़ेसाती 14 मई 2054 – 5 मार्च 2062 †पहला चरण 14 मई 2054 से · दूसरा चरण 7 अप्रैल 2057 से · तीसरा चरण 27 मई 2059 से
- अर्धाष्टम (चतुर्थ) शनि 12 जुल॰ 2034 – 27 अग॰ 2036
वृषभ राशि
- साढ़ेसाती 17 अप्रैल 1998 – 26 मई 2005 †पहला चरण 17 अप्रैल 1998 से · दूसरा चरण 6 जून 2000 से · तीसरा चरण 23 जुल॰ 2002 से
- साढ़ेसाती 2 जून 2027 – 12 जुल॰ 2034 †पहला चरण 2 जून 2027 से · दूसरा चरण 7 अग॰ 2029 से · तीसरा चरण 30 मई 2032 से
- साढ़ेसाती 7 अप्रैल 2057 – 9 मई 2064 †पहला चरण 7 अप्रैल 2057 से · दूसरा चरण 27 मई 2059 से · तीसरा चरण 10 जुल॰ 2061 से
- अर्धाष्टम (चतुर्थ) शनि 27 अग॰ 2036 – 12 जुल॰ 2039
- अष्टम शनि 26 जन॰ 2017 – 24 जन॰ 2020
मिथुन राशि
- साढ़ेसाती 6 जून 2000 – 15 जुल॰ 2007 †पहला चरण 6 जून 2000 से · दूसरा चरण 23 जुल॰ 2002 से · तीसरा चरण 5 सित॰ 2004 से
- साढ़ेसाती 7 अग॰ 2029 – 27 अग॰ 2036 †पहला चरण 7 अग॰ 2029 से · दूसरा चरण 30 मई 2032 से · तीसरा चरण 12 जुल॰ 2034 से
- साढ़ेसाती 27 मई 2059 – 3 जुल॰ 2066 †पहला चरण 27 मई 2059 से · दूसरा चरण 10 जुल॰ 2061 से · तीसरा चरण 24 अग॰ 2063 से
- अर्धाष्टम (चतुर्थ) शनि 22 अक्टू॰ 2038 – 26 सित॰ 2041
- अष्टम शनि 24 जन॰ 2020 – 17 जन॰ 2023
कर्क राशि
- साढ़ेसाती 23 जुल॰ 2002 – 9 सित॰ 2009 †पहला चरण 23 जुल॰ 2002 से · दूसरा चरण 5 सित॰ 2004 से · तीसरा चरण 31 अक्टू॰ 2006 से
- साढ़ेसाती 30 मई 2032 – 12 जुल॰ 2039 †पहला चरण 30 मई 2032 से · दूसरा चरण 12 जुल॰ 2034 से · तीसरा चरण 27 अग॰ 2036 से
- अष्टम शनि 28 अप्रैल 2022 – 29 मार्च 2025
सिंह राशि
- साढ़ेसाती 5 सित॰ 2004 – 3 अग॰ 2012 †पहला चरण 5 सित॰ 2004 से · दूसरा चरण 31 अक्टू॰ 2006 से · तीसरा चरण 9 सित॰ 2009 से
- साढ़ेसाती 12 जुल॰ 2034 – 26 सित॰ 2041 †पहला चरण 12 जुल॰ 2034 से · दूसरा चरण 27 अग॰ 2036 से · तीसरा चरण 22 अक्टू॰ 2038 से
- अष्टम शनि 29 मार्च 2025 – 23 फ़र॰ 2028
कन्या राशि
- साढ़ेसाती 31 अक्टू॰ 2006 – 2 नव॰ 2014 †पहला चरण 31 अक्टू॰ 2006 से · दूसरा चरण 9 सित॰ 2009 से · तीसरा चरण 15 नव॰ 2011 से
- साढ़ेसाती 27 अग॰ 2036 – 29 अग॰ 2044 †पहला चरण 27 अग॰ 2036 से · दूसरा चरण 22 अक्टू॰ 2038 से · तीसरा चरण 25 जन॰ 2041 से
- अर्धाष्टम (चतुर्थ) शनि 26 जन॰ 2017 – 24 जन॰ 2020
- अष्टम शनि 2 जून 2027 – 17 अप्रैल 2030
तुला राशि
- साढ़ेसाती 9 सित॰ 2009 – 26 अक्टू॰ 2017 †पहला चरण 9 सित॰ 2009 से · दूसरा चरण 15 नव॰ 2011 से · तीसरा चरण 2 नव॰ 2014 से
- साढ़ेसाती 22 अक्टू॰ 2038 – 7 दिस॰ 2046 †पहला चरण 22 अक्टू॰ 2038 से · दूसरा चरण 25 जन॰ 2041 से · तीसरा चरण 11 दिस॰ 2043 से
- अर्धाष्टम (चतुर्थ) शनि 24 जन॰ 2020 – 17 जन॰ 2023
- अष्टम शनि 7 अग॰ 2029 – 30 मई 2032
वृश्चिक राशि
- साढ़ेसाती 6 अक्टू॰ 1982 – 14 दिस॰ 1990 †पहला चरण 6 अक्टू॰ 1982 से · दूसरा चरण 21 दिस॰ 1984 से · तीसरा चरण 16 दिस॰ 1987 से
- साढ़ेसाती 15 नव॰ 2011 – 24 जन॰ 2020 †पहला चरण 15 नव॰ 2011 से · दूसरा चरण 2 नव॰ 2014 से · तीसरा चरण 26 जन॰ 2017 से
- साढ़ेसाती 25 जन॰ 2041 – 4 दिस॰ 2049 †पहला चरण 25 जन॰ 2041 से · दूसरा चरण 11 दिस॰ 2043 से · तीसरा चरण 7 दिस॰ 2046 से
- अर्धाष्टम (चतुर्थ) शनि 28 अप्रैल 2022 – 29 मार्च 2025
- अष्टम शनि 30 मई 2032 – 12 जुल॰ 2034
धनु राशि
- साढ़ेसाती 21 दिस॰ 1984 – 8 नव॰ 1993 †पहला चरण 21 दिस॰ 1984 से · दूसरा चरण 16 दिस॰ 1987 से · तीसरा चरण 20 मार्च 1990 से
- साढ़ेसाती 2 नव॰ 2014 – 17 जन॰ 2023 †पहला चरण 2 नव॰ 2014 से · दूसरा चरण 26 जन॰ 2017 से · तीसरा चरण 24 जन॰ 2020 से
- साढ़ेसाती 11 दिस॰ 2043 – 24 फ़र॰ 2052 †पहला चरण 11 दिस॰ 2043 से · दूसरा चरण 7 दिस॰ 2046 से · तीसरा चरण 6 मार्च 2049 से
- अर्धाष्टम (चतुर्थ) शनि 29 मार्च 2025 – 23 फ़र॰ 2028
- अष्टम शनि 12 जुल॰ 2034 – 27 अग॰ 2036
मकर राशि
- साढ़ेसाती 16 दिस॰ 1987 – 16 फ़र॰ 1996 †पहला चरण 16 दिस॰ 1987 से · दूसरा चरण 20 मार्च 1990 से · तीसरा चरण 5 मार्च 1993 से
- साढ़ेसाती 26 जन॰ 2017 – 29 मार्च 2025 †पहला चरण 26 जन॰ 2017 से · दूसरा चरण 24 जन॰ 2020 से · तीसरा चरण 28 अप्रैल 2022 से
- साढ़ेसाती 7 दिस॰ 2046 – 5 फ़र॰ 2055 †पहला चरण 7 दिस॰ 2046 से · दूसरा चरण 6 मार्च 2049 से · तीसरा चरण 24 फ़र॰ 2052 से
- अर्धाष्टम (चतुर्थ) शनि 2 जून 2027 – 17 अप्रैल 2030
- अष्टम शनि 27 अग॰ 2036 – 12 जुल॰ 2039
कुंभ राशि
- साढ़ेसाती 20 मार्च 1990 – 17 अप्रैल 1998 †पहला चरण 20 मार्च 1990 से · दूसरा चरण 5 मार्च 1993 से · तीसरा चरण 1 जून 1995 से
- साढ़ेसाती 24 जन॰ 2020 – 23 फ़र॰ 2028 †पहला चरण 24 जन॰ 2020 से · दूसरा चरण 28 अप्रैल 2022 से · तीसरा चरण 29 मार्च 2025 से
- साढ़ेसाती 6 मार्च 2049 – 7 अप्रैल 2057 †पहला चरण 6 मार्च 2049 से · दूसरा चरण 24 फ़र॰ 2052 से · तीसरा चरण 14 मई 2054 से
- अर्धाष्टम (चतुर्थ) शनि 7 अग॰ 2029 – 30 मई 2032
- अष्टम शनि 22 अक्टू॰ 2038 – 26 सित॰ 2041
मीन राशि
- साढ़ेसाती 5 मार्च 1993 – 6 जून 2000 †पहला चरण 5 मार्च 1993 से · दूसरा चरण 1 जून 1995 से · तीसरा चरण 17 अप्रैल 1998 से
- साढ़ेसाती 28 अप्रैल 2022 – 17 अप्रैल 2030 †पहला चरण 28 अप्रैल 2022 से · दूसरा चरण 29 मार्च 2025 से · तीसरा चरण 2 जून 2027 से
- साढ़ेसाती 24 फ़र॰ 2052 – 27 मई 2059पहला चरण 24 फ़र॰ 2052 से · दूसरा चरण 14 मई 2054 से · तीसरा चरण 7 अप्रैल 2057 से
- अर्धाष्टम (चतुर्थ) शनि 30 मई 2032 – 12 जुल॰ 2034
शनि की ढैया — चंद्र से चतुर्थ और अष्टम भाव में शनि
साढ़ेसाती के बाहर भी चंद्र से शनि के दो गोचर देखे जाते हैं। चतुर्थ भाव में — अर्धाष्टम शनि — शनि घर, माता, वाहन और मन की शांति पर बैठता है। अष्टम भाव में — अष्टम शनि — स्वास्थ्य, आयु और अचानक आने वाली बाधाओं पर; दोनों में यह ज़्यादा कठिन है। हर एक लगभग ढाई साल चलता है, इसलिए इन्हें शनि की ढैया कहते हैं।
हर चरण का पाया
जिस क्षण शनि किसी राशि में प्रवेश करता है, उस समय गोचर का चंद्रमा आपकी जन्म राशि से किस भाव में है, उसी से उस गोचर का पाया तय होता है। एक ही शनि-प्रवेश किसी राशि के लिए सोने का पाया होता है और किसी के लिए लोहे का।
| पाया | जन्म चंद्र से गोचर का चंद्र | चरण कैसा बीतता है |
|---|---|---|
| सोने का पाया (स्वर्ण) | प्रथम, षष्ठ, एकादश | सबसे हल्का — सबसे कम नुकसान के साथ फल |
| चाँदी का पाया (रजत) | द्वितीय, पंचम, नवम | हल्का — दबाव रहता है, पर टूटन नहीं |
| ताँबे का पाया (ताम्र) | तृतीय, सप्तम, दशम | मिला-जुला — कुछ हानि, कुछ लाभ |
| लोहे का पाया (लौह) | चतुर्थ, अष्टम, द्वादश | सबसे भारी — गोचर का पूरा बोझ |
एक ही राशि के दो लोगों की साढ़ेसाती अलग क्यों होती है
ऊपर की तारीखें एक राशि वाले हर व्यक्ति के लिए एक-सी हैं। उनमें होता क्या है, वह नहीं। चार बातें तय करती हैं:
- लग्न से शनि किन भावों का स्वामी है। वृषभ और तुला लग्न के लिए शनि योगकारक है — कुंडली का सबसे शुभ ग्रह; मकर और कुंभ लग्न के लिए वह स्वयं लग्नेश है। बाकी लग्नों के लिए वह कठिन भावों का स्वामी होता है, और उसका दबाव झेलना भारी पड़ता है।
- जन्म कुंडली में शनि का बल — राशि, वर्ग कुंडलियों में स्थिति, वक्री है या नहीं। बलवान शनि गोचर में मेहनत के बदले देता है; कमज़ोर शनि लेता है।
- उस समय चल रही दशा। अच्छी महादशा में आई साढ़ेसाती कड़ी मेहनत जैसी लगती है; कठिन दशा में वही गोचर हानि जैसा।
- हर चरण का पाया और वेध — ऊपर की श्रेणी, और यह कि कोई दूसरा ग्रह गोचर में रुकावट डाल रहा है या नहीं।
गोचर फल आपकी अपनी कुंडली पर शनि का गोचर पाया और वेध के साथ दिखाता है, और आपकी जन्म कुंडली बताती है कि शनि कहाँ बैठा है और किन भावों का स्वामी है।
साढ़ेसाती में क्या करें
शनि लगातार मेहनत का फल देता है और छोटे रास्तों की पोल खोलता है। इस दौर में वही माँगा जाता है जो शनि का स्वभाव है: सामने का कर्तव्य निभाइए, बोझ बिना शिकायत उठाइए, और फल से चिपकना छोड़िए — «कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन» (भगवद्गीता 2.47)। परंपरा में शनि भगवान विष्णु के कूर्म अवतार से जुड़ा है — वह कच्छप जिसने मंदराचल को अपनी पीठ पर स्थिर रखा। उस रूप में भगवान का स्मरण और अपना काम उन्हें अर्पित करना ही शनि के अनुरूप उपाय है।
प्रश्न
साढ़ेसाती क्या होती है?
जन्म राशि (जन्म के समय चंद्रमा की राशि) से बारहवीं, पहली और दूसरी राशि में शनि का गोचर साढ़ेसाती कहलाता है। हर राशि में शनि लगभग ढाई साल रहता है, इसलिए कुल समय करीब साढ़े सात साल होता है। यह दबाव, देरी, ज़िम्मेदारी और धैर्य की परीक्षा का समय है।
अभी किन राशियों पर साढ़ेसाती चल रही है?
शनि 29 मार्च 2025 से 2 जून 2027 तक मीन राशि में है। इस दौरान मेष राशि पर साढ़ेसाती का पहला चरण, मीन पर दूसरा और कुंभ पर तीसरा चरण चल रहा है। सिंह राशि पर अष्टम शनि और धनु राशि पर अर्धाष्टम शनि की ढैया है।
चंद्र राशि देखें या नाम की राशि?
जन्म के समय की चंद्र राशि — जन्म राशि। साढ़ेसाती जन्म के चंद्रमा से गिनी जाती है; नाम के पहले अक्षर से जुड़ी राशि केवल नामकरण की परंपरा है और बताती नहीं कि चंद्रमा कहाँ था। जन्म राशि नहीं पता तो जन्म विवरण डालिए, कैलकुलेटर राशि निकाल देगा।
क्या साढ़ेसाती हमेशा बुरी होती है?
नहीं। दबाव हमेशा रहता है, पर उससे निकलता क्या है, यह आपकी कुंडली पर टिका है। जहाँ शनि लग्न से शुभ भावों का स्वामी हो — वृषभ और तुला लग्न के लिए वह सबसे शुभ ग्रह है — और जन्म कुंडली में बलवान हो, वहाँ साढ़ेसाती अक्सर जीवन की सबसे बड़ी ज़िम्मेदारियाँ और सबसे टिकाऊ उपलब्धियाँ लाती है। जहाँ शनि कमज़ोर हो और कठिन भावों का स्वामी हो, वहाँ इस दौर की हानि पूरी लगती है। उस समय की दशा तय करती है कि कितना असर उतरेगा।
शनि की ढैया और अष्टम शनि क्या है?
चंद्र राशि से चतुर्थ या अष्टम भाव में शनि का गोचर ढैया कहलाता है — हर एक लगभग ढाई साल। चतुर्थ में अर्धाष्टम शनि घर, माता और मन की शांति पर दबाव डालता है; अष्टम में अष्टम शनि स्वास्थ्य, बाधाओं और अचानक की परेशानी पर, और दोनों में यही कठिन है।
जीवन में साढ़ेसाती कितनी बार आती है?
शनि लगभग साढ़े उनतीस साल में राशिचक्र का एक चक्कर पूरा करता है, इसलिए पिछली साढ़ेसाती खत्म होने के 22–23 साल बाद अगली आती है। ज़्यादातर लोगों के जीवन में दो या तीन बार; लंबी आयु में चार बार भी।
क्या जन्म का सही समय ज़रूरी है?
केवल चंद्र राशि चाहिए। चंद्रमा लगभग सवा दो दिन में राशि बदलता है, इसलिए ज़्यादातर जन्म तिथि ही काफ़ी है — जन्म का समय तभी मायने रखता है जब उसी दिन चंद्रमा ने राशि बदली हो।
- हिन्दी में जन्म कुंडलीलग्न, राशि, नक्षत्र, नौ ग्रह और चल रही दशा — हिन्दी में, मुफ़्त।
- गोचर फलआज — या किसी भी तारीख पर — हर ग्रह का गोचर आपकी चंद्र राशि से, पाया और वेध के साथ।
- मंगल दोष कैलकुलेटरक्या आप मांगलिक हैं? लग्न, चंद्र और शुक्र से मंगल, हर परिहार के साथ।
- Sade Sati — EnglishThe same calculator and dates, in English.
